कर्मयोग

प्रस्तुत कविता जीवन में आने वाली असहजताओं से जूझने और चुनौनियों का सामना करने की प्रेरणा दे रही है।
जीवन एक संघर्षशील मार्ग है जिसमें यदा-कदा हार और निराशा का भी सामना करना पड़ता है।
चुनौतियों से हार न मानते हुये कर्मठता के साथ अंत तक प्रयासशील रहना चाहिये।

कर्मभूमि की कर्मशाला में
किये प्रयोग घनेरे
कुछ खोया कुछ पाया राह में
एक लौ से मिटे अंधेरे

कर्मयोग ही मानव जीवन
कर्मयोग है मानव का तन
कर्मयोग ही मन का चिंतन
कर्मयोग है देव का वंदन

कर्मकुटिर से लो कर्मठता
पर्णकुटिर से छाया लो
जीर्ण कुटीर से त्यागो जीवन
छोड़ सब मोह माया को 

चन्दन लेप मलो ललाट पर 
क्रंदन रुदन छोड़ कर
मंदन मन की गति रखो तुम 
निज ह्रदय झकझोर कर 
       
त्राटक ध्यान में करो साधना 
चंचल दृष्टि को बांधे
विकट भाव हो या अभाव हो
टिके रहो निज मन को साधे

हर पल प्रतिफल आतुर दौड़े
पास आने को तेरे
योग कर संयोग जुटा ले
निपटा कष्ट घनेरे
कर्मभूमि की कर्मशाला में एक लौ से मिटे अंधेरे
X~ एक लौ से मिटे अंधेरे ~X

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