‘कोरोना’ कलंकित अपवाद या महामारी?

सन् 2020 धरती के इतिहास में कोरोना वर्श के नाम से अंकित होगा, और साथ ही साथ इस षताब्दि के सबसे बड़े कलंकित अपवाद के नाम से भी
“The Scandal of the Millenium”.
चीनी उत्पाद कोरोना ने आज पूरे विष्व में अपना कहर और ज़हर बरसा रखा है। यहाॅं तक कि इंसानी जीवन लीला को सन्न से सन्नाटा बनाते हुये इसकी गतिविधियों को भी मोड़ दिया है।

‘कोरोना’ कलंकित अपवाद या महामारी?

डराने का सबसे बड़ा माध्यम ‘E. मीडिया
WHO द्वारा कोरोना कोे महामारी घोशित किये जाने के बाद से ये जानलेवा और महामारी बन गया है, लेकिन जितना कहर इस कोरोना ने नहीं बरसाया है उससे कहीं बहुत ज्यादा और भयावह तरीके से इसके परिणामों को अति घातक दुश्परिणाम बताते हुये गलत तरीके से बढ़ा-चढ़ा कर सोषल और इलेट्राॅनिक मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करके आम जन के दिमागों में फेैलाया गया है। तो अपने देष की इ. मीडिया भी किसी से पीछे क्यों रहेगी अतः इसी प्रकार अपने देष भारत में भी इसका पूरजोर प्रसारण चल रहा है।

भय का मायाजाल
पूरे विष्व के लगभग सभी देषों में कोरोना से मौतें होती जा रही हैं, ऐसा इलेक्ट्राॅनिक मीडिया द्वारा समाचारों में प्रति दिन बताया जा रहा है। लेकिन इन सभी मौत के पीछे वास्तविकता क्या रही ये न तो कोई जान सकता है न ही इसको जानने के लिये अनुसंधान ही किया जा सकता है क्योंकि ये पहले से ही दिमाग में बैठ गया है कि कोरोना एक जानलेवा महामारी है।

क्या कोई किसी भी अनुसंधान के माध्यम से पता लगा सकता है कि पूरे विष्व में जितने लोग केवल कोरोना के नाम से मरे हैं-
* उनमें से कितने लोग डर के कारण मरे हैं?
* उनमें से कितने लोग डर से हुये हर्ट अटैक से मरे हैं?
* उनमें से कितने लोग डर से अत्यधिक बढ़े हुये रक्त चाप के कारण मरे हैं?
* उनमें से कितने लोग एक से अधिक किसी पुरानी बिमारी से पीड़ित थे?
षायद इसका जवाब कभी भी कोई अनुसंधान या खोज आम जनता को नहीं दे पायेगी।

कोरोना का डर कैसे और क्यों??? इस भयभीत बना देने वाले तथ्यों को समझिये और स्वयं आंकलन कीजिये।
प्रस्तुत वाइरल बिमारी ने दिमाग में क्यों घर कर लिया है? आम तौर पर किसी भी स्वस्थ आदमी को सर्दी, जुकाम, खाॅंसी, सिर दर्द, गले में खरास या बुखार जैसी बिमारी होना बहुुत ही साधारण और आम बात है, जो मौसम के बदलाव अथवा षरीर में सर्द-गर्म के असर के कारण हो जाता है और इन सारी आम बिमारियों के लक्षण कोरोना के कथनानुसार पूरी तरह मेल खाते हैं क्योंकि जब जुकाम होता है तो छीकते-छीकते गले या सिर में दर्द होना या षरीर का तापमान बढ़ जाना अति साधारण है और यहाॅं कोरोना के भी ये ही सारे लक्षण हैं जो किसी भी मरीज के दिमाग पर हावी होकर उसे नाहक ही मौत की नींद सुला देने में सक्षम हैं।
यही कारण है कि आज किसी स्वस्थ व्यक्ति को भी सर्दी, जुकाम हो रहा है तो वो जानलेवा कोरोना की आषंका से ही इतना भयभीत हो जा रहा है कि अब वो बचेगा नहीं और बस यही सोचते सोचते उस व्यक्ति की मृत्यु हर्ट अटैक या दिमाग पर रक्त चाप के बढ़ने के चलते हो जा रही है।
इस भयभीत बना देने वाले तथ्यों को समझिये और स्वयं आंकलन कीजिये।

प्रति दिन की मृत्यु दर (भारत समेत पूरे विष्व की)
आइये समझते हैं बिना कोरोना या बिना किसी महामारी के भारत समेत पूरे विष्व में प्रति दिन होने वाली मृत्यू दर को निम्न आंकड़ों के आधार पर-
गूगल सर्च से US CIA की विष्व फैक्टबूक के बताये गये आंकड़ों के आधार पर केवल भारत में प्रति दिन लगभग 23,000 साधरणतया मौतें भिन्न-भिन्न कारणों से होती हैं, जिनमें करीब 1500 मौतें सड़क दूर्घटना तथा आत्महत्याओं से होती हैं। अर्थात भारत में प्रति वर्श करीब 84 लाख मृत्यु होती है, और यदि पूरे विष्व की बात करें तो करीब 110 मृत्यु प्रति मिनट और करीब 6 करोड़ मृत्यु साधारण रूप में प्रति वर्श होती हैं।
मैं ये आंकड़े आपके सामने इसलिये रख रहा हॅूं क्योंकि जिस मौत के तांडव को हमारे सामने इतना और इतना डरा कर परोसा गया है कि कोरोना होने से पहले कोरोना का डर और भ्रम मानसिकता पर हावी होकर न जाने कितनी जाने ले चुका है।
स्वयं आंकलन कीजिये कि जब से कोरोना का सम्राज्य आया है तब से किसी और बिमारी के नाम से होने वाली मृत्यु लगभग विलुप्त सी हो गयी है, जबकि प्रतिवर्श विभिन्न बिमारियों से मरने वाले आंकड़े भी लाखों में हैं।

जरा सोचिये और समझिये


WHO द्वारा कोरोना कोे महामारी घोशित किये जाने के पीछे एक बहुत बड़ा व्यापारिक शडयंत्र छिपा हो सकता है जो कि आम जनता तक षायद कभी भी सामने नहीं आयेगा। इसके पीछे बहुत बड़े-बड़े मेडिकल माफियाओं का भी हाथ हो सकता है, जो इस बिमारी के एंटीडोट को अपनी मुनाफाखोरी के चलते बाजार में जल्द नहीं उतरने देंगे।
इसके अलावा एक सबसे बड़ी बात कि
प्रति दिन पूरे विष्व में लाखों की संख्या में कोरोना मरीज बढ़ रहे हैं और प्रतिदिन लगभग इसी औसत में ठीक भी होतेे जा रहे हैं।
तो यहाॅं गौर करने वाली बात ये है कि जब कोरोना महामारी है और जिसके इलाज की अभी तक कोई दवा भी नहीं है तो कोरोना मरीज ठीक कैसे हो रहे हैं???
जाहीर सी बात है कि कोरोना यदि महामारी होता तो किसी भीे कोरोना पाॅजिटिव मरीज का ठीक हो पाना असम्भव था।
इसके अलावा यह भी सम्भव है कि जिन्हें कोरोना पाॅजिटिव बता कर इलाज किया जा रहा है वे वास्तव में सम्भावित कोरोना पाॅजिटिव हैं अर्थात जो मरीज ठीक होते जा रहे हैं उनमें कोई भी कोरोना मरीज है ही नहीं।

कोरोना का डर और मेरा अनुभव (My Home Quarantine Days)
मेरा होम संगरोधक दिन और कुछ डर से मृत्यू के प्रत्यक्ष उदाहरण

मैं 16 मार्च 2020 को बिहार से राजस्थान गया था, और मेरे लौटने का रेल टिकट 19 मार्च को था, लेकिन 19 की रेल निरस्त हो गई और 24 मार्च से भारत में लाॅकडाउन का निर्देष जारी हो गया। इस बीच मैने घर लौटने के लिये क्रमषः और तीन बार 23 मार्च, 01 अपै्रल, 15 अप्रैल का रेल टिकट लिया लेकिन हर अंतिम दिन पर लाॅकडाउन और विस्तारित होता चला गया। फिर 3 मई को राज्य सरकारों द्वारा अपने घर जाने की अनुमति ई.पास द्वारा प्राप्त हुई।
मैने निजी वाहन से 3 मार्च को जिला चित्तोैड़गढ़ (राजस्थान) से बिहार के लिये यात्रा प्रारंभ की और 5 मार्च को अपने घर पहॅंॅुच गया। निजी वाहन से आने की वजह से मेडिकल जाॅंच के बाद Home Quarantine के लिये अनुमति मिल गई। अब यहाॅं समझिये कि डर आपके दिमाग पर किस तरह हावी हो सकता है
मैं प्रतिदिन अपने कंप्युटर पर दिन भर कुछ काम में व्यस्त रहता हूॅं। भ्वउम फनंतंदजपदम के दौरान भी मैं यही करता रहा। लेकिन पंद्रहवें दिन कुछ ज्यादा कार्य होने की वजह से मैं दिन भर कंप्युटर पर व्यस्त रह गया जिसकी वजह से षाम को सिर में हल्का दर्द महसूस हुआ और इस दर्द से ज्यादा भय भी महसूस हुआ।
मैं प्रतिदिन थोड़ी मात्रा में हर्बल काढ़ा पीता था, लेकिन चूॅंकि सिर में दर्द था और भय बनने लगा था तो इस षाम मैने मात्रा बढ़ा कर सवा लीटर करीब कर दिया और गर्मा-गरम सवा लीटर काढ़ा पी गया जिसमें सभी गर्म चीजें तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी, अदरक आदि डाला हुआ था। अब इतनी ज्यादा मात्रा और ऊपर से गरमी का मौसम तो अपना असर दिखयेगा ही।
काढ़ा पीने के करीब आधे घंटे बाद मुझे आठ दस छींकें आ गईं, सिर दर्द और बढ़ने लगा, दिमाग में भारीपन होने लगा, गले और फेंफड़ों में दबाव जैसा बनने लगा, दिल धड़कने की गति भी काफी बढ़ गई। इस समय षाम के आठ बज रहे थे। और वर्तमान में मेरे षरीर में हो रहे सारे लक्षण इस भयावह बिमारी कोरोना की तरफ इषारा करने लगे। अब देखिये मेरे दिमाग पर डर कैसे हावी होने लगा?
मैं अपने कमरे में आ कर लेट गया। मैने अपनी यात्रा को याद करना षुरू किया। मैं कहाॅं कहाॅं रूका था, कहाॅं पानी पीया था, किन लोगों से बात की थी, कितनी दूरी से बात की थी और इन सब से ज्यादा भयावह था कि मैने आज सूबह अपने बेटे को गोदी में लिया था। इन सारी बातों के डर ने मेरे दिमाग में कारोना ने कब्जा करना चालू कर दिया जिसकी वजह से मन में डर और भयानक डर एकत्रित होने लगा। अब मुझे बस ये ही लग रहा था कि अब मेरा अंतिम समय आ गया है, लेकिन इससे कहीं बहुत ज्यादा अपने बेटे के बारे में सोच-सोच कर मन और आषंकित और भयाक्रंात होने लगा। एक ही जगह बेसूध सा लेटे-लेटे अब रात के 11 बजने लगे। मन विचित्र तरीके से आषंकित और डरा हुआ था।
इसके अलावा मैं जब सोने का प्रयास कर रहा था तो मेरी अत्यधिक तेज हृदय गति और घुटती हुई साॅंस के चलते मैं पूरी रात सो नहीं सका। मुझे बार-बार ये अहसास हो रहा था कि यदि मैं सो गया तो कहीं सोता ही न रह जाऊॅं।
बहुत बेचैनी और घबराहट में रात 12 बजे के करीब मैने अपने एक मित्र को फोन किया और उसको अपनी वर्तमान हालत बताई। उसने सभी बातों को गौर से सुना और समझा, फिर उसने कहा कि मैं मेरे दिमाग से कोरोना के डर को निकाल दूॅं क्योंकि मुझे कोरोन हो ही नहीं सकता। फिर उसने बताया कि अधिक मात्राम में गरम काढ़ा पीने और बाहरी तापमान की गर्मी के चलते षरीर में भी गरमी हो गई है जिसकी वजह से बेचैनी और हृदय गति बढ़ गई। उसने मुझसे करीब घंटे भर बातचीत की और मेरा ब्रेन वाष कर दिया। अब फोन रखने के बाद मैं भय मुक्त हो चुका था। हालांकि उस अधिक पानी का सेवन करने से मेरे षरीर में बेचैनी और घबराहट अब भी बरकरार थी, जिसकी वजह से मैं करीब तीन दिन तक ठीक से सो नहीं पाया था, लेकिन अब मेरे दिमाग से कोरोना बिल्कुल निकल चुका था, जिससे मेरे मन और दिमाग को काफी सुकून मिला।
लेकिन मेरे स्वस्थ षरीर में एक नई समस्या अपना घर बना गई, मैं उच्च रक्त चाप का मरीज जरूर बन गया।

डर से मौत का एक प्रत्यक्ष उदाहरण
मेरे एक मित्र के अंकल अरेबिया में नौकरी करते हुये वहीं रह रहे थे। वहाॅं भी जब लाॅकडाउन का आदेष हुआ तबसे वो अपने रूम में अकेले रह रहे थे। न बाहर जाना ओैर न किसी से मिलना था। एक सुबह वो सो कर उठे और छींकने लगे। उन्हें केवल साधारण जुकाम था। षाम होते होते जुकाम की वजह से सिर में दर्द चालू हो गया और फिर क्या था, इन महाषय ने कोरोना का डर अपने दिमाग में बैठा लिया और अगली सुबह होते होते इन्होने दुनिया को अलविदा कर दिया, केवल डर के कारण।
मेडिकल जाॅंच में इन्हें पूरी तरह कोरोना निगेटिव पाया गया और बताया गया कि इनका डर की वजह से हार्ट फेल हो गया है, जिसकी वजह से इनकी मौत हो गई।
ये तो डर और भय के केवल दो प्रत्यक्ष उदाहरण हंै जिनके बारे में मैं बता रहा हूॅं। अभी तो पूरी दुनिया में इस डर से जाने कितनी मौतें हुई होंगी, जिनका न तो कोई आंकड़ा है और न ही कभी मिल सकेगा।

इसलिये डरना मना है
इसमें कोई दो राय नहीं कि कोरोना बिमारी नहीं है, लेकिन वास्तव में ये कोई भयावह महामारी नहीं है। ये सर्दी, जुकाम, बुखार की तरह ही एक साधारण वाइरल बिमारी है, जिससे किसी भी परिस्थती में डरने और भयाक्रांत होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है जिससे आपके दिमाग में कोरोना का खौफ बैठ जाये और आप मेरी तरह किसी अन्य बिमारी से ग्रसित हो जायें।
हमें केवल सावधान रहते हुये सोषल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुये, स्वच्छता और सफाई से रहने की जरूरत है। अधिक मास्क या सेनिटाइजर का प्रयोग भी आपके षरीर के लिये घातक है।
यदि आपको अपने षरीर में कोरोना होने का जरा सा भी षक हो तो सबसे पहले अपने आप को परिवार से कुछ दूर और अलग में रखकर प्रकट हुई बिमारी का आयुवैदिक तथा होम्योपैथिक परामर्ष दाताओं से उचित इलाज लें। आप सर्वथा ठीक हो जायेंगे। यथा सम्भव अस्पताल का रूख ना करें।
तथा डर और वहम दिमाग पर बिल्कुल भी हावी नहीं होने दें।

X ~ X ~ X

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *